जीवन भर की मेहनत से अर्जित संपत्ति को अगली पीढ़ी को सौंपना एक भावनात्मक और जिम्मेदारी भरा कार्य है। हालांकि, इस प्रक्रिया में विरासत कर (Inheritance Tax) की चिंता कई लोगों के मन में रहती है। भारत में संपत्ति उत्तराधिकार के नियम दुनिया के कई अन्य देशों से अलग हैं, और इन्हें समझना अपनी संपत्ति को कानूनी रूप से सुरक्षित रखने के लिए अनिवार्य है।
भारत में वर्तमान में कोई आधिकारिक 'विरासत कर' या 'एस्टेट ड्यूटी' नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संपत्ति हस्तांतरण पूरी तरह से मुफ्त है। आयकर विभाग (Income Tax Department) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, विरासत में मिली संपत्ति को प्राप्त करते समय तो टैक्स नहीं लगता, लेकिन नामांतरण (Mutation) और भविष्य में इसकी बिक्री पर कर के नियम लागू होते हैं। आज के इस विशेष लेख में, हम भारत में विरासत कर की स्थिति और संपत्ति हस्तांतरण के कानूनी पहलुओं का विशेषज्ञ विश्लेषण करेंगे।
1. भारत में विरासत कर का इतिहास और वर्तमान स्थिति
भारत में 'एस्टेट ड्यूटी एक्ट, 1953' के तहत विरासत कर लगाया जाता था, लेकिन इसे 1985 में राजीव गांधी सरकार द्वारा समाप्त कर दिया गया था। इसका मुख्य कारण यह था कि इस कर से होने वाली वसूली की तुलना में इसे लागू करने की प्रशासनिक लागत बहुत अधिक थी। तब से लेकर आज तक, भारत में विरासत में मिली संपत्ति पर कोई सीधा कर नहीं है।
हालांकि, समय-समय पर सरकार द्वारा विरासत कर को फिर से लागू करने की चर्चा होती रहती है। वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत, आपको विरासत में मिली संपत्ति के मूल्य पर कोई कर नहीं देना होता, लेकिन आपको वित्तीय पारदर्शिता के लिए इसका उचित रिकॉर्ड रखना चाहिए।
2. आयकर अधिनियम की धारा 56(2) और छूट
भारत में उपहारों (Gifts) पर कर लगता है, लेकिन विरासत इस नियम का एक बड़ा अपवाद है।
विरासत: एक कर-मुक्त उपहार
आयकर अधिनियम की धारा 56(2) के अनुसार, यदि कोई संपत्ति वसीयत (Will) के माध्यम से या उत्तराधिकार के नियमों के तहत प्राप्त की जाती है, तो उसे 'अन्य स्रोतों से आय' के रूप में नहीं माना जाता है। इसका अर्थ है कि विरासत में मिली राशि, आभूषण या संपत्ति प्राप्त करने वाले के हाथों में पूरी तरह से कर-मुक्त है।
भविष्य में होने वाले लाभ पर कर
टैक्स की छूट केवल संपत्ति प्राप्त करते समय मिलती है। यदि आप उस विरासत में मिली संपत्ति से कोई आय अर्जित करते हैं (जैसे किराया) या भविष्य में उसे बेचते हैं, तो आपको कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) देना होगा। बिक्री के समय संपत्ति की खरीद की लागत वही मानी जाएगी जो मूल मालिक (पिता या माता) ने चुकाई थी।
3. संपत्ति हस्तांतरण और स्टाम्प शुल्क: छिपी हुई लागत
भले ही केंद्र सरकार विरासत कर नहीं लेती, लेकिन राज्य सरकारें संपत्ति के हस्तांतरण पर शुल्क लेती हैं।
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1स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty): कई राज्यों में, यदि संपत्ति वसीयत के माध्यम से हस्तांतरित की जा रही है, तो स्टाम्प शुल्क बहुत कम या शून्य होता है। लेकिन नामांतरण के समय कुछ प्रशासनिक शुल्क देना पड़ सकता है।
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2नामांतरण (Mutation): सरकारी रिकॉर्ड (जैसे नगर निगम या राजस्व विभाग) में अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को नामांतरण कहते हैं। यह कानूनी रूप से संपत्ति का मालिक बनने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
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3सक्सेशन सर्टिफिकेट: यदि कोई वसीयत नहीं है, तो उत्तराधिकारियों को अदालत से सक्सेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करना होता है, जिसमें अदालत की फीस संपत्ति के मूल्य के प्रतिशत के रूप में देनी होती है।
4. वसीयत (Will) का महत्व और पंजीकरण
विवादों से बचने और सुचारू हस्तांतरण के लिए एक स्पष्ट वसीयत होना अनिवार्य है।
भारत में वसीयत का पंजीकरण (Registration) अनिवार्य नहीं है, लेकिन कानूनी रूप से इसे पंजीकृत कराना हमेशा बेहतर होता है। एक पंजीकृत वसीयत को अदालत में चुनौती देना बहुत कठिन होता है और यह संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेज करता है।
यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के मर जाता है, तो संपत्ति का बँटवारा धर्म-आधारित उत्तराधिकार कानूनों (जैसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम या मुस्लिम पर्सनल लॉ) के अनुसार होता है। इससे अक्सर परिवार में लंबी कानूनी लड़ाइयाँ शुरू हो जाती हैं। इसलिए, एक पेशेवर वसीयत तैयार करना आपकी वित्तीय योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
5. विरासत हस्तांतरण के विभिन्न परिदृश्य
यहाँ तीन सामान्य स्थितियाँ दी गई हैं जिनसे आप अपनी स्थिति को बेहतर समझ सकते हैं:
स्थिति A. स्पष्ट वसीयत के साथ संपत्ति हस्तांतरण
प्रक्रिया: सरल। वसीयत के आधार पर नामांतरण के लिए आवेदन करें। स्टाम्प शुल्क न्यूनतम होगा और उत्तराधिकार स्पष्ट होने के कारण बैंक खाते और संपत्तियाँ आसानी से हस्तांतरित हो जाएँगी।
स्थिति B. बिना वसीयत के पैतृक संपत्ति का बँटवारा
प्रक्रिया: मध्यम। सभी कानूनी उत्तराधिकारियों को एक सहमति पत्र (No Objection Certificate) देना होगा। यदि कोई विवाद है, तो अदालत के माध्यम से बँटवारा होगा, जिसमें समय और पैसा दोनों अधिक लग सकते हैं।
स्थिति C. विरासत में मिली विदेशी संपत्ति
प्रक्रिया: जटिल। यदि संपत्ति भारत के बाहर है, तो आपको उस देश के विरासत कर नियमों और भारत के FEMA (Foreign Exchange Management Act) नियमों का पालन करना होगा। इसके लिए विशेषज्ञ परामर्श अनिवार्य है।
भारत में संपत्ति उत्तराधिकार पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या मुझे विरासत में मिली ज्वेलरी पर टैक्स देना होगा? ▼
नहीं, आयकर अधिनियम की धारा 56(2) के तहत आभूषणों की विरासत भी कर-मुक्त है। हालांकि, भविष्य में उन्हें बेचने पर कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होगा।
क्या विरासत में मिला कर्ज भी उत्तराधिकारी को चुकाना पड़ता है? ▼
हाँ, लेकिन केवल विरासत में मिली संपत्ति के मूल्य की सीमा तक। उत्तराधिकारी अपनी व्यक्तिगत संपत्ति से मृतक का कर्ज चुकाने के लिए बाध्य नहीं है।
क्या नामांतरण (Mutation) के बिना मैं संपत्ति बेच सकता हूँ? ▼
नहीं। खरीदार और बैंक हमेशा सरकारी रिकॉर्ड में विक्रेता का नाम देखना चाहेंगे। नामांतरण के बिना संपत्ति का बेचना कानूनी रूप से असुरक्षित और कठिन है।
निष्कर्ष: समय पर योजना बनाना ही सबसे बड़ी बचत है
भारत में विरासत कर की अनुपस्थिति एक बड़ी राहत है, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता अभी भी बरकरार है। अपनी संपत्ति के लिए एक स्पष्ट वसीयत बनाना और अपने उत्तराधिकारियों को संपत्तियों के बारे में सूचित करना पारिवारिक शांति और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका है।
याद रखें कि टैक्स कानून और स्थानीय शुल्क समय के साथ बदल सकते हैं। संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले एक अच्छे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या वकील से परामर्श करना हमेशा बुद्धिमानी होती है।
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